आँसू, आहें और ग़म

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तेरी दुनिया में जीने से तो बेहतर हैं हम मर जायें,
वही आँसू, वही आहें, वही ग़म चाहें हम जिधर जायें,
कोई तो ऐसा घर होता जहाँ इस सब से बच जाये,
वही बेगाने चेहरे हैं चाहें हम जिधर जायें।

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